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तालिबान ने अमेरिका को अब यमन
में उलझाया
तालिबान, अलकायदा जैसे कट्टरपंथी मुस्लिम
संगठनों पर अंकु श लगाने के लिए ही अमेरिका और उसके सहयोगी देशों
ने इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में अपनी सेनाओं को भेज रखा
है। लेकिन इसके बावजूद भी आतंकवाद पर कोई अंकुश नहीं लग रहा है।
अमेरिका पहले ही इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान में उलझा हुआ है
और अब उसे यमन में भी सैनिक कार्यवाही करनी पड़ रही है। ताजा
जानकारी के अनुसार अमेरिका ने पाकिस्तान में अफगानिस्तान की सीमा
से लगे वजिरीस्तान में जो ड्रोन हमले किए हैं, उससे बचने के लिए
तालिबान और अलकायदा जैसे आतंकी संगठनों के कार्यकत्ताü अब यमन
में जाकर छिप गए हैं। अमेरिका ने हाल ही में जिस नाइजीरियाई युवक
को गिरफतार किया है, उसने यह भी बताया कि विमान को विस्फोट से
हवा में ध्वस्त करने का प्रशिक्षण यमन में ही लिया था। अमेरिका
ने इस नाइजीरियाई युवक को पिछले दिनों अमेरिका के विमान में उस
समय गिरफतार किया, जब वह विस्फोट करने ही वाला था। इस घटना से
प्रतीत होता है कि आतंकवाद अपने पैर पसारता जा रहा है। अमेरिका
जिस भी मुस्लिम देश में जाकर अंकुश लगाने की कोशिश करता है, उससे
पहले ही दूसरे देश में आतंकवादी पहुंच जाते हैं । अमेरिका ने जब
इराक पर हमला किया तो उसे तुरन्त बाद अफगानिस्तान पर कार्यवाही
करनी पड़ी और अब अमेरिका की नज़र में आतंकवादियों का गढ़ पाकिस्तान
बन गया है। यही वजह है कि अपनी अत्याधुनिक तकनीक ड्रोन हवाई
हमलों का उपयोग आज सबसे ज्यादा पाकिस्तान में किया जा रहा है। इन
ड्रोन हमलों से बचने के लिए ही आतंकवादी अब यमन में पहुंच गए
हैं। अमेरिका को भी इस बात की जानकारी है कि धीरे धीरे यमन
आतंकवादियों का ठिकाना बनता जा रहा है इसीलिए कार्यवाही भी शुरू
हो गई है। यदि यमन में भी अमेरिका और उसके सहयोगी देश अपनी
सेनाओं को भेजते हैं तो यह अन्तर्राष्ट्रीय स्तर पर एक जोखिम भरा
काम होगा। अमेरिका को अपनी विदेश नीति पर पुनर्वचार करना चाहिए।
बराक ओबामा के राष्ट्रपति बनने के बाद अमेरिका की विदेश नीति में
बदलाव की उम्मीद थी, लेकिन ताजा हालत बताते हैं कि अमेरिका और नए
देशों में उलझता जा रहा है। हालांकि बराक ओबामा को शान्ति का
नोबल पुरस्कार मिल गया है, लेकिन अभी तक भी अमेरिका शान्ति के उस
मार्ग पर नहीं चला है, जिसमें समझौता वार्ता हो। देखना यह है कि
अमेरिका अपनी सैन्य ताकत के दम पर आतंकवादियों पर कितना अंकुश
लगा पाता है। यह भी सही है कि आतंकवादियों का कोई धर्म नहीं
होता। भले ही अधिकांश आतंकी मुस्लिम समुदाय से सम्बन्ध रखते हों,
लेकिन इराक, इरान, अफगानिस्तान, पाकिस्तान आदि में मुसलमान ही
मुसलमान को मार रहा है। दुनिया भर के मुसलमानों को भी इस मुद्दे
पर गम्भीरता से विचार करना चाहिए कि मुस्लिम देशों में आतंकवादी
घटनाएं क्यों हो रही हैं ?
जहां तक भारत में आतंकवाद का सवाल है तो इस
पर भी गम्भीरता से विचार होना चाहिए। मुस्लिम देशों में रह रहे
मुसलमानों के मुकाबले भारत में रहने वाले मुसलमान ज्यादा
सुविधाजनक जीवन व्यतीत कर रहे हैं। भारत के कई राज्य तो ऐसे बन
गए हैं , जिनमें मुस्लिम आबादी ज्यादा हो गई है। चूंकि भारत एक
धर्मनिरपेक्ष राष्ट्र है इसलिए यहां सभी धर्मो के लोगो को रहने
का अधिकार है, लेकिन यह भी जरूरी है कि सभी धर्मो के लोग आपसी
सदभावना के साथ रहें। यदि पाकिस्तान के आतंकवादी भारत में आकर
मारकाट करते हैं, तो यहां रहने वाले मुसलमानों का यह पहला फर्ज
बनता है कि वह आतंकवादियों से मुकाबला करने में सरकार को सहयोग
दें। कई बार भारत में आतंकवादियों को इसलिए सफलता मिल जाती है कि
स्थानीय लोगों का सहयोग मिलता है। यदि आतंकवादी भारत में रहने
वाले कुछ लोगों के सहयोग से आतंकी घटनाएं करते हैं तो यह इस
धर्मनिरेपक्ष राष्ट्र के लिए अच्छा नहीं है। किसी भी नागरिक की
अपनी धार्मिक भावनाएं हो सकती हैं, लेकिन जब अपने देश पर आतंकी
हमला हो तो धर्म का भेद मिटा कर देश की सेवा सबसे पहले करनी
चाहिए। भारत में रहने वाले मुसलमानों का यह दायित्व है कि वह
भारत को इराक, अफगानिस्तान और पाकिस्तान न बन दें। अब समय आ गया
है जब देश के मुसलमानों को आतंकवाद के खिलाफ एकजुट होकर खड़े होना
चाहिए। इसमें कोई दो राय नहीं कि भारत में खासकर ग्रामीण
क्षेत्रों में मुसलमान और हिन्दु बहुत ही भाईचारे के साथ रहते
हैं । लेकिन आतंकवादी यह नहीं चाहते कि भारत में हिन्दु-मुस्लिम
भाईचारा बना रहे।
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