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अजमेर जिला प्रमुख के चुनाव में कांग्रेस की करारी हार

 पायलट ने कांग्रेस की लुटिया डुबाई
 हाल ही में  संम्पन हुए पंचायती राज के चुनावों में अजमेर जिले में कांग्रेस को करारी हार का सामना करना पड़ा है। जिला परिषद के 32 सदस्यों में से कांग्रेस के मात्र 11 सदस्य ही चुनाव जीत पाए। फलस्वरूप जिला परिषद पर आसानी से भाजपा का कब्जा हो गया। इसी प्रकार 8 पंचायत समितियों में से 3 में कांग्रेस की हार हुई है। सरपंच भी अधिकतर भाजपा की विचारधारा वाले हैं। यानि पंचायती राज के चुनावों में कांग्रेस की स्थिति बहुत कमजोर रही है। यह तब हुआ है जब अजमेर से सचिन पायलट लोकसभा के सांसद हैं। चूंकि पायलट केन्द्र में राज्यमन्त्री हैं और कांग्रेस के राष्ट्रीय महासचिव राहुल गांधी से मित्रता होने के कारण कांग्रेस की राजनीति में उनका जोरदार दखल है। यही वजह रही कि पंचायती राज के चुनावों में पायलट ने जिसे चाह, उसे ही कांग्रेस का टिकट मिला, लेकिन पायलट ने चुनाव के दौरान ऐसा कोई कार्य नहीं किया, जिससे कांग्रेस को वोट मिल पाते। कांग्रेसियों की माने तो गलत टिकट वितरण के कारण ही अजमेर में इतनी करार हार हुई है। यह हार भी तब हुई जब गत लोकसभा और विधानसभा चुनाव में कांग्रेस के उम्मीदवार विजयी हुए। लोकसभा का चुनाव तो खुद सचिन पायलट ने जीता। विधानसभा की आठ सीटों में से पांच पर कांग्रेस के विधायक हैं।
 यह सही है कि अजमेर में कांग्रेस के नेताओं की आपसी खींचतान है, लेकिन पायलट ने अपने लोकसभा चुनाव के दौरान जिस प्रकार राजनीतिक जाजम बिछायी, उस प्रकार से पंचायती राज चुनाव में रणनीति नहीं बनायी। पायलट ने अपने पंसदीदा व्यक्तियों को टिकट तो दिलवा दिया, लेकिन प्रचार में सक्रिय भूमिका निभाने से बच गए। पायलट का यह मानना रहा कि अजमेर के  मतदाता अपने आप कांग्रेस को वोट दे देंगे। इस सोच का परिणाम यह रहा कि 32 जिला परिषद के वाडों में से 21 पर कांग्रेस के उम्मीदवार हार गए। पंचायती राज चुनाव में क्षेत्रीय सांसद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है, यदि कांग्रेस इन चुनावों में जीत जाती तो सचिन पायलट जीत का श्रेय लेने में पीछे नहीं रहते। इसलिए अब पायलट को हार का दायित्व भी अपने ऊपर लेना चाहिए और कांग्रेस आलाकमान को यह बताना चाहिए कि उनके निर्वाचन क्षेत्र में कांग्रेस की हार कैसे हुई। जहां तक पायलट की अब तक की कार्य प्रणाली का सवाल है तो वह अजमेर के मतदाताओं को प्रभावित नहीं कर सके हैं। सांसद और केन्द्रीय मन्त्री बनके बाद अजमेर जिले की जनता को यह उम्मीद थी कि अब अजमेर का विकास तेजी से होगा, लेकिन विकास होना तो दूर पहले हुए निर्णयों में ही बदलाव हो रहा है। जो केन्द्रीय विशवविद्यालय अजमेर के चाचियावास में खुलना था वह अजमेर से 45 किलोमीटर दूर किशनगढ़ के आगे खोला जा रहा है। पायलट माने या नहीं, लेकिन केन्द्रीय विशवविद्यालय की स्थापना अजमेर न होने की वजह से भी पंचायतीराज चुनाव में कांग्रेस को हार का सामना करना पड़ा है। विशवविद्यालय चाचियावास में स्थापित होगा इसका निर्णय पिछली भाजपा सरकार में ही हो गया था, लेकिन कांग्रेस का राज आने पर सचिन पायलट इस विशवविद्यालय को जयपुर के निकट ले गए। पंचायती राज चुनाव के परिणामों से सचिन पायलट को सबक लेना चाहिए क्योंकि इसके दूरगामी परिणाम होंगे। 6 माह बाद ही अजमेर नगर निगम के चुनाव होने हैं  और अजमेर शहर की दोनों विधानसभा सीटों पर पहले से ही भाजपा के विधायक मौजूद हैं। सवाल उठता है कि जब अनुकूल माहौल में जिला परिषद पर कांग्रेस काबिज नहीं हो सकी तो 6 माह बाद शहर के प्रतिकूल माहौल में कांग्रेस को जीत कैसे मिलेगी? क्या सचिन पायलट सिर्फ स्वयं की जीत में रूचि रखते हैं? खुद के सांसद और मन्त्री बन जाने के बाद क्या अजमेर जिले में कांग्रेस की जीत न हो? हालांकि अभी तक पायलट ने स्वयं हार का स्वाद नहीं चखा है। बालिग होने के बाद दौसा संसदीय क्षेत्र से सांसद  बने और फिर अपने राजनीतिक प्रभाव के कारण अजमेर संसदीय क्षेत्र से भी चुनाव जीत गए, लेकिन आज अजमेर जिले में जो हालात हैं, उससे नहीं लगता कि अगला लोकसभा का चुनाव सचिन पायलट अजमेर से जीत पायेंगे। ग्रामीण क्षेत्र के विकास में जिला परिषद की महत्वपूर्ण भूमिका होती है। केन्द्रीय योजनाओं  की क्रियान्विति भी जिला परिषद के माध्यम से ही होती है। ऐसा न हो कि भाजपा के शासन वाली जिला परिषद और केन्द्रीय योजना के बीच तालमेल न बैठ पाए। हालांकि मुख्यमन्त्री अशोक गहलोत और प्रदेश कांग्रेस कमेठी के अध्यक्ष सी.पी. जोशी ने कड़ी से कड़ी जोड़ने की बात कही थी, लेकिन सचिन पायलट के निर्वाचन क्षेत्र में सत्ता की यह कड़ी टूट गई है।
नहीं चला पायलट का जादू
जिला परिषद व पंचायत समितियों में हार के बाद खुद कांग्रेसी भी मानते हैं कि अब आमजन के दिलो-दिमाग से पायलट का के्रज भी खत्म हो रहा है। जो चुनाव परिणाम आए हैं, उनसे साबित हो गया है कि विधानसभा और लोकसभा चुनावों के बाद कांग्रेस के जनाधार का ग्राफ काफी गिरा है। कांग्रेसियों का कहना है कि पायलट ने चुनाव के वक्त भरोसा दिलाया था कि वे जनता के हर दुज्ख-दर्द में भागीदार बनेंगे, लेकिन वे सिर्फ उदघाटन करने, फीता काटने, और ट्रेनों को हरी झण्डी दिखाने के लिए ही अजमेर आते हैं। उन्हें जनता से कोई सरोकार नहीं रह गया है। कार्यकत्ताüओं से भी दूरी बनाए रहते हैं। 
( दैनिक नवज्योति के 10 फरवरी के अंक से साभार)  

 

 

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