राजनेता कामरेड
ज्योति बसु के जीवन से सीख लें
विभिन्न राजनीतिक दलों के नेताओं को कम्युनिस्ट पार्टी के प्रणेता
और पश्चिम बंगाल के 23 वषों तक मुख्यमन्त्री रहे स्वगीüय ज्योति
बसु के जीवन से सीख लेनी चाहिए। यह निष्कर्ष निकला है अजमेर के
इण्डोर स्टेडियम में 23 जनवरी को आयोजित सर्वदलीय श्रद्धांजलि सभा
में। यह सभा कामरेड ज्योति बसु के निधन पर आयोजित की गई। सभा में
प्रमुख राजनीतिक दलों के नेताओं, बुद्धिजीवियों, चितंकों,
साहित्यकारों एवं विभिन्न एम्पलाईज यूनियनों के प्रतिनिधियों ने
भाग लिया। इस सर्वदलीय सभा की अध्यक्षता कामरेड दिनेश गौड़ ने की,
जबकि संचालन भभक के सम्पादक एस.पी. मित्तल ने किया। सभा में यह
माना गया कि कामरेड बसु सिर्फ कम्युनिस्ट पार्टी से बंधकर नहीं
रहे, बल्कि उन्होंने राजनीति में सिद्धान्त, ईमानदारी, मेहनत और
कार्यकुशलता के आयाम कायम किए। जब उन्हें देश के प्रधानमन्त्री
बनने का अवसर मिला तो पार्टी के फैसले के कारण प्रधानमन्त्री का पद
स्वीकार नहीं किया। साम्प्रदायिक सदभावना के लिहाज से भी उन्होंने
अपनी कार्यकुशलता का परिचय दिया। 1984 के सिख दंगों और फिर 1992
में बावरी मस्जिद ढाहने पर देश भर में भले ही जातीय तनाव हुआ,
लेकिन पश्चिम बंगाल में सौहार्द बना रहा। यह ज्योति बसु का ही
करिश्मा रहा कि पश्चिम बंगाल में कम्युनिस्ट पार्टी का एकछत्र राज
रहा। सभा में पूर्व विधायक डा. श्रीगोपाल बाहेती, नगर कांग्रेस
कमेटी के अध्यक्ष एडवोकेट जसराज, बैंक एम्पलाईज यूनियन के रवि
वर्मा, राजस्थान सीटू के महासचिव रविन्द्र शुक्ला, बहुजन समाज
पार्टी के गणपत बोहरा, सीपीआईएम के नागेश कुमार शर्मा, कामरेड
हेमचन्द, सीपीआई के रमेश टेलर, सीपीएम के कृष्णकान्त वर्मा,
फारवर्ड ब्लाक के धमेन्द्र लालवानी, पीयूसीएल के डी.एल. त्रिपाठी,
अनन्त भटनागर, राज्य कर्मचारी महासंघ के भंवरसिंह जोधा, बीएसएनएल
एम्पलाईज यूनियन के वी.पी. शर्मा, एनएसयूआई के अध्यक्ष नौरत
गुर्जर, रंजीत मलिक, डाक कर्मचारी संघ के हरि दिवाकर, प्रहलाद
सोगरा, डा. सुरेश अग्रवाल, प्रोफेसर एस.एन.सिंह, आलोक श्रीवास्तव,
प्रेम बिहारी शर्मा, गोपीकिशन आदि ने अपने विचार रखें। सभा में
कामरेड एस.के. कपूर ने ज्योति बसु के निधन पर एक प्रस्ताव पढ़ा जिसे
सर्वसम्मति से स्वीकृत किया गया। अन्त में कामरेड आर.सी. गुप्ता ने
सभी का आभार प्रकट किया।