गावस्कर भी आ गए।
गावस्कर ने
अन्तर्राष्ट्रीय स्तर
पर अपनी निष्पक्ष छवि
बनायी है और इसलिए
गावस्कर कर कथन
महत्वपूर्ण रहा। अब
श्रीलंका की टीम पर यह
आरोप नहीं लग सकता कि
हारने की वजह से खेलने से
मना कर दिया। पिच खराब
होने को लेकर अब बीसीसीआई
और दिल्ली बोर्ड आमने-सामने
हैं। अरूण जेटली और चेतन
चौहान पिच पर गड़बड़ी होने
का ठीकरा बीसीसीआई पर फोड़
रहे है, जबकि बीसीसीआई के
पदाधिकारी सारी जिमेदारी
दिल्ली बोर्ड पर डाल रहे
है। असल में यह कोई तकनीकी
गड़बड़ी नहीं रही बल्कि
क्रिकेट में हो रही
राजनीति का परिणाम है।
दिल्ली बोर्ड पर शरद पवार
के विरोधियों का कब्जा
होने के कारण बीसीसीआई ने
पिच के निर्माण में कोई
भूमिका नहीं निभायी।
कायदे से पिच निर्माण
बीसीसीआई की तकनीकी कमेटी
के देखरेख में होता है,
लेकिन साफ जाहिर है कि
बीसीसीआई की तकनीकी समिति
ने अपनी जिम्मेदारी नहीं
निभायी। आज भले ही दिल्ली
बोर्ड की गलती सामने आए,
लेकिन दुनिया भर में तो
बीसीसीआई की निंदा हुई
है। लेकिन इससे शरद पवार
को कोई फ र्क नहीं पड़ता
क्योंकि उन्होंने देश की
कीमत पर भापजा के अरूण
जेटली और चेतन चौहान को
मात दे दी है। अब आईसीसी
दिल्ली के फिरोजशाह कोटला
मैदान पर
अन्तर्राष्ट्रीय
क्रिकेट मैच के लिए दो
तीन वर्षों तक पाबन्दी
लगता है तो इसका नुकसान
अरूण जेटली और चेतन चौहान
को ही होगा। इससे दिल्ली
बोर्ड की आर्थिक स्थिति
भी खराब होगी। हो सकता है
कि दिल्ली में अरूण जेटली
और चेतन चौहान के खिलाफ
माहौल बनने लगे और दोनों
को अपने पद से हटना पड़े।
यदि ऐसा होता है तो यह शरद
पवार की क्रिकेट की
राजनीति में जीत होगी
क्योंकि फिर दिल्ली
क्रिकेट बोर्ड पर उनके
समर्थकों का कब्जा हो
जाएगा। असल में आज
क्रिकेट में सबसे ज्यादा
राजनीति हो रही है।
बेशुमार पैसा होने के
कारण केन्द्रीय मंत्रियों, मुख्यमंत्री और
राजनीतिक पार्टी के नेता
क्रिकेट संघों पर कब्जा
करते जा रहे हैं। ताजा
उदाहरण राजस्थान
क्रिकेट संघ का है, जिस पर
हाल ही में प्रदेश
कांग्रेस के अध्यक्ष और
केन्द्रीय ग्रामीण
विकास मंत्री सी.पी. जोशी
काबिज हुए है। इसे पहले
गुजरात क्रिकेट संघ के
अध्यक्ष पद पर वहां के
मुख्यमंत्री नरेन्द्र
मोदी विराजमान हो गए।
बिहार क्रिकेट संघ के
अध्यक्ष पद पर पहले से ही
राष्ट्रीय जनता दल के
सुप्रीमों लालू प्रसाद
यादव कब्जा जमाये बैठे
है। जम्मू कश्मीर
क्रिकेट संघ पर
मुख्यमंत्री उमर अब्दुला
के पिता और केन्द्रीय
मंत्री फारूख अब्दुला
विराजमान है। अन्य राज्यों
के क्रिकेट संघों पर भी
राजनेताओं का ही कब्जा
है। राजनेताओं की
सक्रियता के कारण ही अनेक
बार आरोप लगते रहे है कि
देश की क्रिकेट टीम में
योग्य खिलाçड़यों का चयन
नहीं होता। बीसीसीआई
औरराज्य क्रिकेट संघों
के पदाधिकारियों का दखल
टीम के खिलाçड़यों के चयन
में रहता ही है।
स्वाभाविक है कि जब
राजनेता आपस में मिलकर
टीम चयन समिति का गठन
करेंगे तो उनका अपना
नजरिया होगा। यदि चयन
समिति राजनेताओं के
नजरिए के मुताबिक खिलाçड़यों
का चयन नहीं करेगी तो ऐसी
चयन समिति को जल्दी जल्दी
बदल दिया जाएगा। आज भले
ही भारतीय क्रिकेट टीम
दुनिया की नंबर वन टीम हो,
लेकिन यदि यही हालात रहे
तो टीम में बिखराव हो
जाएगा और इसकी जिम्मेदारी
राजनेताओं की ही होगी।