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  सोच समझ कर बोला करें अशोक गहलोत
आदरणीय अशोक जी,
सादर नमस्कार
 कोई माने या नहीं, लेकिन मैं आपको राजनीति में एक अच्छा इंसान समझता हूं। मेरा अब तक यह भरोसा है कि आप संवेदनशील होने के साथ-साथ अपनी कथनी और करनी में अन्तर भी नहीं करते। आप जो कहते हैं, उस पर अमल भी करते हैं। मुझे याद है कि जब आप अखिल भारतीय कांग्रेस कमेटी के महामन्त्री थे, तब भी मैंने एक खुला पत्र आपको लिखा था। तब उस खुले पत्र में आपसे आग्रह किया गया था कि आप अपनी कथनी के अनुरूप मार्बल   किंग अशोक पाटनी के परिवार में हो रहे विवाह समारोह में न जाएं। तब मैंने आपको यह अहसास कराया था कि आर.के. माबüल संस्थान के मालिक अशोक पाटनी इस विवाह समारोह में लाख नहीं ,करोड़ रूपया खर्च कर रहे हैं। आपको भी विवाह के निमत्रण के साथ हजारों रूपये की कीमत वाला  गिफ्ट  मिला था। लेकिन मुझे इस बात सन्तोष रहा कि आप अशोक पाटनी के परिवार में आयोजित शाही विवाह में नहीं गए। खुला पत्र पढ़ने के बाद तब आपने मुझे अपना पत्र भी भिजवाया। चूंकि आप अशोक पाटनी के शाही विवाह में उस समय नहीं गए इसलिए मुझे पिछले दिनों आपके उस बयान पर कोई आश्चर्य नहीं हुआ जो आपने गत 12 फरवरी को जयपुर में आयोजित गांधीवादियों के एक समारोह में दिया। लेकिन मात्र दस दिन बाद मुझे तब आश्चर्य हुआ, जब आप 21 फरवरी को जयपुर में आयोजित एक शाही विवाह में शामिल हुए। यह विवाह था हरियाणा  के मुख्यमन्त्री भूपेन्द्र सिंह हुडा के पुत्र दीपेन्द्र सिंह का। दीपेन्द्र ने नागौर की कांग्रेसी सांसद ज्योति  मिर्धा  की छोटी बहन श्वेता के साथ विवाह किया। हालांकि इस समारोह में अनेक केन्द्रीय मन्त्री, राज्यपाल, वरिष्ठ अधिकारी और योग गुरू बाबा रामदेव तक शामिल हुए। शामिल होने वाले अधिकांश वीआईपी शाही शादियों में जाते रहते हैं और उन्हें ऐसे आयोजनों पर कोई ऐतराज भी नहीं है। लेकिन ऐसे शाही आयोजनों में यदि आप शामिल होते हैं  तो अंगुली उठना स्वाभाविक है। मैं पहले ही लिख चुका हुआ कि मैं अभी भी आपको राजनीति में एक अच्छा इंसान मानता हूं इसीलिए आपसे यह सवाल कर रहा हूं कि आपने 12 फरवरी को जयपुर में आयोजित गांधीवादियों के समारोह में अपनी कथनी के विपरीत बयान क्यों दिया। जब आपको यह पता था कि दस बाद ही अपने ही गृह प्रदेश में आपको एक शाही शादी में शामिल होना है तो फिर गांधीवाद का पाठ क्यों पढ़ाया? मैं यह समझता हूं कि एक राजनेता की राजनीतिक  मजबूरियां होती हैं, लेकिन आप जैसे राजनेता को सोच-समझ कर बोलना चाहिए। आपको ऐसा कोई बयान नहीं देना चाहिए, जिससे मात्र दस दिन बाद ही आपको पलटना पड़े।  आप शाही शादियों से कितने खफा हैं और शाही शादी करने वालों को  आप कैसा समझते हैं , इस बात का अन्दाजा राजस्थान पत्रिका के 13 फरवरी के अंक में प्रथम पृष्ठ पर प्रकाशित खबर से लगाया जा सकता है। मैं अपने इस खुले पत्र के साथ राजस्थान पत्रिका में 13 फरवरी को प्र्रकाशित आपके बयान के सन्दर्भ वाली खबर को ज्यों का त्यों प्रकाशित कर रहा हूं। मैं यह उम्मीद करता हूं कि आप मेरे इस खुले पत्र के साथ-साथ ही राजस्थान पत्रिका में प्रकाशित आपके बयान को भी पढ़ लें। यदि आपके नीचे का स्टाफ भभक का यह अंक आप तक पहुंचा दे, तो आप खुद मनन कर लें कि भविष्य में आपको सोच समझ कर बोलना चाहिए।
 आपकी कथनी और करनी में कभी भी अन्तर न हो, ऐसी मेरी ईश्वर से प्रार्थना है।   
प्रतिष्ठा में                                                                                   आपका
अशोक जी गहलोत                                                                      एस.पी. मित्तल
मुख्यमन्त्री- जयपुर                                                                 editor@bhabhak.com