भारतीय
प्रशासनिक सेवा के वरिष्ठ अधिकारी और राजस्थान राजस्व मण्डल के
अध्यक्ष राकेश हूजा की गिनती उन चुनिन्दा नौकरशाहों में होती है,
जो सरकार की योजनाओं की क्रियान्विति वफादारी के साथ करते हैं।
राकेश हूजा ने हाल ही में सरकार के उस प्रस्ताव पर सहमति जता दी
है, जिसमें राजस्व मण्डल की सर्किट बैंच जोधपुर में एक माह में
दस दिन लग सकेगी। हालांकि इस सहमति पर राजस्व मण्डल के वकील कड़ा
विरोध कर रहे हैं, लेकिन राकेश हूजा ने वो ही किया जो राज्य
सरकार चाहती है। यह पहला अवसर है जब प्रदेश के किसी शहर में एक
माह में दस दिन सर्किट बैंच लगेगी। सब जानते हैं कि जोधपुर
राजस्थान के मुख्यमंत्री अशोक गहलोत का गृह जिला है। अशोक गहलोत
माने या नहीं, लेकिन राज्य की नौकरशाही उनका इशारा समझती है।
अशोक गहलोत ने जोधुपर के विकास के लिए कोई कसर नहीं छोड़ी है।
अजमेर में खुलने वाली आईआईटी भी अब जोधपुर में ही खुल रही है।
राजस्व मण्डल की सर्किट बैंच एक माह मे सी दस दिन जोधुपर में
लगने से अजमेर के वकीलों के हितों पर प्रतिकूल असर पड़ेगा। सर्किट
बैंच दस दिन लगने का मतलब है कि एक माह में 15 दिन राजस्व मण्डल
का कार्य जोधुपर में ही होगा। फाइव डे वीक के अन्तर्गत एक माह
में 22 कार्य दिवस ही होते हैं, और इन 22 दिनों में दो दिन
त्यौहारों या अन्य कारणों से अवकाश हो जाता है। यानि एक माह में
बीस कार्य दिवसों में से दस दिन राजस्व मण्डल का कार्य जोधपुर
में होगा। अशोक गहलोत और राकेश हूजा भले ही कुछ ना कहे, लेकिन
जोधपुर में दस दिन सर्किट बैंच लगाने के पीछे किसकी मंशा है यह
अब जग जाहिर हो गया है। अजमेर के वकील कितना भी बड़ा आन्दोलन कर
लें , लेकिन अशोक गहलोत और राकेश हूजा के गठजोड़ को तोड़ नहीं सकते
हैं । राकेश हूजा ने जोधपुर में सर्किट बैंच लगाने के प्रस्ताव
पर अपनी जो सहमति भिजवायी है वह राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप
ही है।

जानकार सूत्रों के अनुसार सरकार में बैठे राजनेता और आला
अधिकारी राकेश हूजा की कार्य कुशलता से भली भान्ति परिचित हैं।
यही वजह है कि पांच माह पहले से ही राकेश हूजा के पुनर्वास की
योजनाएं बनायी जा रही हैं। हूजा आगामी जून माह में भारतीय
प्रशासनिक सेवा से सेवानिवृत हो रहे हैं। टी. श्रीनिवासन को
मुख्य सचिव बना दिए जाने के बाद राकेश हूजा के मुख्य सचिव बनने
की संभावनाएं समाप्त हो गई। हूजा की वरिष्ठता को ध्यान रखते हुए
ही उन्हें मुख्य सचिव के समकक्ष वाले राजस्व मण्डल के अध्यक्ष पद
पर नियुक्ति दी गई। सेवानिवृत्त के बाद हूजा का पुनर्वास इसलिए
भी किया जायेगा ताकि मुख्य सचिव न बनाने की भरपाई की जा सके। इस
मामले में हूजा की धर्मपत्नी श्रीमती मीनाक्षी हूजा भी मददगार
साबित हो सकती हैं। मीनाक्षी हूजा इस समय राजभवन में राज्यपाल की
ओएसडी हैं । वर्तमान समय में राजभवन के ओएसडी की भूमिका बहुत
महत्वपूर्ण है क्योंकि केन्द्र सरकार ने अभी तक भी राजस्थान में
स्थायी राज्यपाल की नियुक्ति नहीं की है। राजस्थान के राज्यपाल
का कार्य अस्थायी तौर पर हिमाचल प्रदेश की राज्यपाल प्रभा राव
देख रही हैं। प्रभा राव चूंकि अधिकांश समय जयपुर के राजभवन में
नहीं रहतीं, इसलिए राजभवन का सभी कार्य मीनाक्षी हूजा करती हैं।
मीनाक्षी हूजा भी प्रशासनिक कार्य में दक्ष हैं और इसीलिए उन्हें
राजभवन में राज्य सरकार का प्रतिनिधि बनाकर भेजा गया है।
मीनाक्षी हूजा भी राज्य सरकार के इशारे को समझ लेती हैं।
जानकार सूत्रों के अनुसार राज्यपाल द्वारा संवैधानिक नियुक्ति
किए जाने में ओएसडी की भूमिका भी महत्वपूर्ण होती है। पांच माह
बाद राज्य सरकार की मंशा के अनुरूप जब राकेश हूजा का पुनर्वास
होगा तो राजभवन में फाइल मीनाक्षी हूजा के सामने से ही गुजरेगी।
राज्य में विश्वविद्यालयों के कुलपति, राजस्थान लोक सेवा आयोग के
सदस्य, सूचना आयोग के आयुक्त, लोकायुक्त, आदि ऐसे अनेक पद हैं
जिन पर राकेश हूजा जैसे सेवानिवृत्त अधिकारी की नियुक्ति आसानी
से हो सकती है। सूत्रों के अनुसार सेवानिवृçत्त के बाद राकेश
हूजा का पुनर्वास हो ही जायेगा, इसका आभास राज्य सरकार ने मौखिक
रूप से राकेश हूजा को करा दिया है।